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G7 Agrees To Implement Price Cap On Russian Oil

International Relations

Current Affairs:

सभी G7 देशों के वित्त मंत्रियों के साथ-साथ यूरोपीय संघ ने रूस से तेल निर्यात पर मूल्य सीमा / price cap लागू करने की अपनी योजना की घोषणा की। हालाँकि, योजना में रूसी गैस शामिल नहीं है, जिस पर यूरोप अभी भी काफी निर्भर है।

Price Cap Plan / मूल्य सीमा:

  • रूसी तेल पर एक मूल्य सीमा की शुरूआत का मतलब है कि नीति पर हस्ताक्षर करने वाले देशों को केवल उसी रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को खरीदने की अनुमति दी जाएगी जो कि मूल्य सीमा / Price Cap पर या उससे कम पर बेचे जा रहे हों
  • वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर प्रभाव को सीमित करते हुए रूस को अपने आक्रामकता के युद्ध से हो रही मुनाफाखोरी को सीमित करने के लिए मूल्य सीमा तैयार की जा रही है।
  • गठबंधन में शामिल होने वाले देशों के लिए को  रूसी तेल को तब तक नहीं खरीदना है जब तक कि कीमत कम नहीं हो जाती या Price Cap के अनुकूल नही की जातीं जहां पर भी Price Cap को निर्धारित किया गया है।
  • उन देशों के लिए जो गठबंधन में शामिल नहीं होते हैं, या कैप मूल्य से अधिक तेल खरीदते हैं, वे गठबंधन देशों द्वारा प्रदान की जाने वाली सभी सेवाओं तक पहुंच खो देंगे।
  • G7 देशों का कहना है कि उनका लक्ष्य तेल की कीमत कम करना है, लेकिन रूस द्वारा बेचे जाने वाले तेल की मात्रा को नहीं, ताकि रूसी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हुए विश्व स्तर पर मुद्रास्फीति को नियंत्रित किया जा सके।

भारत की प्रतिक्रिया:

  • पश्चिमी देशों ने यह कहकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है:
    • संयुक्त राष्ट्र में रूस पर अपने गैर-आलोचनात्मक रुख को बदले,
    • तेल आयात कम करे,
    • रूस से रक्षा और अन्य खरीद को रोके,
    • रुपये-रूबल / rupee-rouble भुगतान तंत्र से बचने के लिए जो उनके प्रतिबंधों को दरकिनार करते हैं।
  • हालाँकि, अब तक, भारत ने इसके लिए कोई हामी नहीं भरी है, और इस बात के बहुत कम संकेत हैं कि नई दिल्ली द्वारा ऐसा करने की संभावना है।
    • हाल ही में संपन्न पूर्वी आर्थिक मंच (ईईएफ) / Eastern Economic Forum (EEF) शिखर सम्मेलन में, भारतीय प्रधान मंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में रूस के साथ संबंधों को मजबूत करने और रूसी तेल क्षेत्रों में भारत के 16 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ावा देने की इच्छा व्यक्त की
  • भारत का रूस से तेल सेवन, जो युद्ध से पहले बहुत कम था, 50 गुना बढ़ गया है। माना जाता है कि भारत सरकार का रुख उसके राष्ट्रीय हित से प्रेरित है, जो इस समय भारतीय उपभोक्ताओं को किफायती तेल उपलब्ध कराना है
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